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केरल में हिंदुओं पर अत्याचार

पिछले कुछ वर्षो से केरल में हिंदुओं पर अत्याचार बढ़ता ही जा रहा है | ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे केरल हिंदुओं के लिए एक राज्य नहीं अपितु एक श्मशान भूमि हो | इसके अलावा केरल में बड़े स्तर पर धर्मांन्तरण भी हो रहा है| पूरा देश और मीडिया आज मानवाधिकार की बात कर रहा है वहीँ केरल के मामले मे सभी कुंडली मारे बैठे हैं |

कन्नूर, केरल के उत्तर में स्थित एक जिला, मार्कसिस्ट आतंक से लम्बे समय से प्रभावित है | यहाँ आये दिन हिन्दुओं पर हिंसक हमले होते हैं | केरल में शिक्षा की दर 93.91% है परंतु हिंदुओं पर बढ़ते अत्याचार को देखते हुए प्रतीत होता है कि केरल शिक्षा के मामले में निरक्षर है | केरल में हिंदुओं पर अत्याचार दिन-प्रति-दिन बढ़ता जा रहा है परन्तु इस पर कोई कार्यवाही नहीं हो रही है | समस्त केरल में हिन्दू बिखरे हुए हैं और असंगठित हैं, ये मात्र चुनाव में वोट देने का कार्य करते हैं, न ही नीति-निर्माण में उनकी कोई सलाह ली जाती है और न ही उनकी समस्याओं के निराकरण में | केरल में हिंदुओं का कोई राजनैतिक दल नहीं होने के कारण इनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पाता है | वास्तव में केरल में हिंदुओं पर अत्याचार इसलिए हो रहे हैं ताकि यहाँ के हिन्दू इस स्थान से पलायन कर जाएँ |

आज कोई भी हिन्दू अपने को हिन्दू बोलने में संकोच करता है, तिलक लगाने में शर्माता है | क्या ये आत्मचिंतन का विषय नहीं है? हिन्दू आपस में ही असंगठित है, उनमें एकता की भावना समाप्त होती जा रही है | माईसेल्फहिन्दू(हिन्दू जागृति संस्थान) ने इन्ही बातों पर विचार करके, सभी हिन्दुओं को एकत्रित करने का प्रण लिया है |

पश्चिम बंगाल और असम दोनों सीमावर्ती राज्य हैं, जहाँ मुस्लिम-ईसाई आबादी तेज़ी से बढ़ रही है | केरल भी इसी मार्ग पर अग्रसर हो रहा है| आज हम बहुसंख्यक होते हुए भी अल्पसंख्यक ब्राह्मण, आदिवासी, भूमिहार इत्यादि क्यों बने हैं? आखिर क्यों हम हिंदुओं में एकता की भावना समाप्त होती जा रही है? माईसेल्फहिन्दू इन्हीं सब बातों को सोच कर विचलित है| माईसेल्फहिन्दू (हिन्दू जागृति संस्थान) निवेदन करता है कि सभी हिन्दू जात-पात भूलकर एवं संगठित होकर एक हिन्दू राष्ट्र का निर्माण करें| एकता में बहुत शक्ति होती है, अगर हम संगठित होंगे तो कुछ लोगों की क्या, किसी देश की हिम्मत नहीं, जो हमें तोड़ सके |

 

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