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कासगंज के कसूरवार कौन ?

हिंदुत्व को प्राचीन समय में सनातन धर्म कहा जाता था। आज हिंदू धर्म के मूल तत्व सत्य ,अहिंसा ,दश क्षमा और दान है...हिंदुत्व सनातन धर्म के रूप में सभी धर्मों का मूलाधार है। हिंदुत्व एक जीवन पद्धति अथवा जीवन दर्शन है जो धर्म,अर्थ,काम और मोक्ष को परम लक्ष्य मान कर व्यक्ति या समाज को नैतिक ,भौतिक मानसिक और आध्यात्मिक उन्नति के मौके मिलते हैं। हिंदू धर्म किसी एक दार्शनिक विचारधारा को नहीं मानता, वहीं ​हिंदू धर्म में किसी तरह की मजहबी पूजा को नहीं मानता,बल्कि ये एक ऐसा धर्म है जो इंसान के भौतिक जरूरतों के सा​थ सा​थ आध्यात्मिक जरूरतों को भी पूरा करता है। विनोबा जी के मुताबिक हिंदू का मुख्य लक्षण उसकी अहिंसा प्रियता है। माईसेल्फ हिंदू भी हिंदुत्व की रक्षा के लिए कर्तव्य बोध रखता है। हम लोगों को सनातन धर्म के प्रति जागरूक करना चाहते हैं और हिंदू धर्म के प्रति सम्मान को वापस लाने का प्रयास कर रहे हैं।

हिंसया दूयते चित्ं तेन हिन्दुरितीरित :।

जिन्होंने हिंदु धर्म का गहन अध्ययन किया है,वे जानते हैं कि हिंदु धर्म सब धर्मों में सर्वश्रेष्ठ है। फ्रांस के नोबल पुरस्कार विजेता रोमां रोला ने विश्व में हिंदु धर्म को सर्वश्रेष्ठ माना है। उन्होंने लिखा  मैंने युरोप और मध्य एशिया के सभी मतों का अध्ययन किया है परंतु मुझे सब में हिंदु धर्म ही सर्वश्रेष्ठ दिखाई देता है, मेरा विश्वास है कि इस इस धर्म के आगे एक दिन समस्त जगत को झुकना पड़ेगा। पृथ्वी पर केवल एक स्थान है जहां के जीवित व्यक्तिों ने प्राचीन काल में अपने स्वप्नों को साकार किया है, वह है भारत । (प्रोफेटस ऑफ द न्यू इंडिया ,प्रील्यूड,पृ:51) आज हिंदुओं को एकजुट होने की जरूरत है। माईसेल्फ हिंदू, का उद्देश्य लोगों को मानवता और धर्म के रूप में एकजुट करना है। जिससे विश्व में हिंदू धर्म के प्रति लोगों की आस्था और भी मजबूत हो सके। क्योंकि आने वाला समय भारत और हिंदुओं के लिए चुनौती वाला हो सकता है। इसलिए वैश,शुद्र हों या फिर ब्राहम्ण जातिवाद से उपर उठ कर सभी को एकजुट होना होगा। गरीब हिंदु परिवारों को आर्थिक तौर पर सशक्त करने के लिए आर्थिक तौर पर मजबूत हिंदुओं को आगे आने की जरूरत है। कुछ ऐसी संस्थाएं और हैल्पलाइन बनानी होंगी जो गरीब हिंदुओं की मदद कर उन्हें आर्थिक तौर पर सदृढ़ बनाएं, इसके इलावा बच्चों को शिक्षित करने की भी जरूरत है। हिंदु तभी सशक्त और एकजुट हो पाएंगे, जब जाति वर्ण से उपर उठकर बात करेंगे। माईसेल्फ हिंदू, हिंदुत्व की भलाई के लिए वचनबध है। जातिवाद को जड़ से मिटाने के लिए हमें एकजुट होना होगा। हम एक ऐसे समाज की रचना करना चाहते हैं जहां लोगों को उनके अच्छे कर्मों के लिए जाना जाए है, न कि उनकी जाति के लिए।


चाहती हैं....जिसके जीता जागता उदाहरण है कासगंज में हुई हिंसा...दरअसल ये विवाद उस वक्त उठा जब अल्पसंख्यक समुदाय के कुछ लोग गणतंत्र दिवस पर कोई कार्यक्रम कर रहे थे...वहीं दूसरी ओर दूसरे समुदाय के लोग गणतंत्र दिवस पर तिरंगा यात्रा निकाल रहे थे ...इसी दौरान प्रोग्राम कर रहे लोगों से रास्ता मांगा ....चूंकि कासगंज कु बुदुनगर में जहां पर ये हिंसा हुई वहां पर गलियां काफी संकरी हैं ...तो अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने बाइ​क रैली निकाल रहे लोगों से थोडा रास्ता दे दिया कि एक एक कर बाइ​क निकाल लें तो रैली में शामिल लोगों ने ऐसा करने से मना कर दिया ...कि पूरी बाइक रैली पूरी यहीं से निकलेगी... बस फिर क्या था ​इसी बात से नाराज दोनों समुदायों में विवाद होने लगा....और ये विवाद इतना बढ गया कि भीड में से किसी ने गोली चला दी और इस फायरिंग में चंदन गुप्ता नामक शख्स की मौत हो गई...जिसके बाद इलाके में हिंसा भडक गई...चंदन गुप्ता के दूसरे दिन अंतिम संस्कार ​कर दिया गया ...पर दूसरे दिन लोगों ने वहां कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया....जिसके बाद खौफजदा अल्पसंख्यक समुदाय के लोग वहां से भाग चुके हैं... पुलिस ने इस मामले में अब तक कई गिरफ्ता​रियां की हैं....वहीं मुख्य आरोपी के सा​थ साथ सलीम नामक एक शख्स को ​भी काबू किया है बताया ​जा रहा है कि सलीम के घर पर ही चंदन को गोली मारी गई थी....खैर जो भी हो चंदन इस दुनिया में नहीं है...एक मां का बेटा हिंसा की भेंट चढ चुका है...और उसकी हत्या एक अनसुलझी पहेली जो निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ पाएगा कि आखिर चंदन के ​साथ असल में उस दिन हुआ क्या था...लेकिन अब चंदन की मौत के बाद कई सवाल भी उठ रहे हैं कि देश में ​असहिष्णुता के नाम पर हो हल्ला करने वाले लोग जिन्होंने अखलाक की मौत के बाद अपने पुरस्कार तक वापिस लौटा दिए थे कासगंज जैसी हिंसा की माईसेल्फ हिंदू हिंदु कड़ी निंदा करता है। क्योंकि हिंदू धर्म अहिंसा की बात करता है। और सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय ही हिंदू धर्म का मूल मंत्र है। लम्हों ने खता की थी ​सदियों ने सजा पाई है। जी हां, ​​​​​हिंसा की ​​जो आग कासगंज में गण्तंत्र दिवस पर उठी उस आग में कासगंज अभी तक जल रहा है। इस हिंसा में चंदन गुप्ता नामक एक युवक की हत्या के मुख्य आरोपी समेत सलीम नाम के शख्स को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। कहने को तो कासगंज में हालात सामान्य हो चुके हैं ,लेकिन इसके बावजूद कासगंज में अमन शां​ति आपसी प्रेम और भाईचारे को फिर से बनाए रखने में वक्त लग सकता है। हिन्दुस्तान की सरजमीं जहां धर्म,जाति ,भाषाओं की विविधता देखने को मिलती है लेकिन विविधताओं के बावजूद यहां पर लोग एकसूत्र में माला ​की ​तरह पिरोये फूलों की तरह हैं। पिछले कुछ सालों के दौरान हमारे देश ने विश्व पटल पर अपनी अलग पहचान ​बनाई है और भारत ने तरक्की और विकास की एक नई इबारत लिखी है।

लेकिन देश में कुछ ऐसी ताकतें सिर उठाती रही हैं ​जो देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम ​देकर देश को हिंसा और अशांति की भट्ठी में झोंकना चाहती हैं। जिसके जीता जागता उदाहरण है कासगंज में हुई हिंसा, दरअसल ये विवाद उस वक्त उठा जब अल्पसंख्यक समुदाय के कुछ लोग गणतंत्र दिवस पर कोई कार्यक्रम कर रहे थे। वहीं दूसरी ओर दूसरे समुदाय के लोग गणतंत्र दिवस पर तिरंगा यात्रा निकाल रहे थे। इसी दौरान प्रोग्राम कर रहे लोगों से रास्ता मांगा चूंकि कासगंज कुबुदुनगर में जहां पर ये हिंसा हुई वहां पर गलियां काफी संकरी हैं तो अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने बाइ​क रैली निकाल रहे लोगों को थोड़ा रास्ता दे दिया कि एक एक कर बाइ​क निकाल लें तो रैली में शामिल लोगों ने ऐसा करने से मना कर दिया कि बाइक रैली पूरी यहीं से निकलेगी। बस फिर क्या था ​इसी बात से नाराज दोनों समुदायों में विवाद होने लगा और ये विवाद इतना बढ़ गया कि भीड में से किसी ने गोली
चला दी और इस फायरिंग में चंदन गुप्ता नामक शख्स की मौत हो गई। जिसके बाद इलाके में हिंसा भडक गई। चंदन गुप्ता के दूसरे दिन अंतिम संस्कार ​कर दिया गया पर दूसरे दिन लोगों ने वहां कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया। जिसके बाद खौफजदा अल्पसंख्यक समुदाय के लोग वहां से भाग चुके हैं। पुलिस ने इस मामले में अब तक कई गिरफ्ता​रियां की हैं। वहीं मुख्य आरोपी के सा​थ साथ सलीम नामक एक शख्स को ​भी काबू किया है बताया ​जा रहा है कि सलीम के घर पर ही चंदन को गोली मारी गई थी। खैर जो भी हो चंदन इस दुनिया में नहीं है एक मां का बेटा हिंसा की भेंट चढ़ चुका है और उसकी हत्या एक अनसुलझी पहेली है जो निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ पाएगी कि आखिर चंदन के ​साथ असल में उस दिन हुआ क्या था। लेकिन अब चंदन की मौत के बाद कई सवाल भी उठ रहे हैं कि देश में ​असहिष्णुता
के नाम पर हो हल्ला करने वाले लोग जिन्होंने अखलाक की मौत के बाद अपने पुरस्कार तक वापिस लौटा दिए थे और यहां तक कि अपने ओहदों से इस्तीफे तक ​दे दिए ​थे वो लोग अब कहां हैं अखलाक को भी भीड़ की हिंसा का शिकार होना पड़ा था। अखलाक की मौत पर इतना हंगामा करने वाले वे लोग अब मूक क्यों हैं।

 

गणतंत्र दिवस के दिन कासगंज में हुई इस हिंसा की कसक यहां के ​बाशिंदों को रह रह  कर परेशान कर रही हैं। क्योंकि इस हिंसा के दौरान जहां इस छोटे से कस्बे की अमन शांति भंग हुई है,वहीं बरसों के आपसी भाईचारे में एक खाई पड़ चुकी है जिसे पाटने में काफी वक्त लग सकता है। हमारा देश तरक्की और विकास की बुलंदियों को लगातार छू रहा है। आज विश्व भर में भारत अपनी खास पहचान बना रहा है। लेकिन कुछ ऐसी असमाजिक ताकतें है जो कासगंज जैसी हिंसात्मक गतीविधियों को अंजाम देकर देश में विकास की रफ्तार को धीमा करना चाहती हैं। माईसेल्फ हिंदू, ऐसी हिंसाओं का बहिष्कार करता है जो देश में नफरतों का माहौल बनाना चाहते हैं। हमारा संकल्प है विश्व पटल पर ऐसे भारत का निर्माण करना जिसकी संस्कृति और परंपराओं की गूंज से प्रत्येक राष्ट्र में इसे प्रसिद्धी प्राप्त हो। ऐसे में हम सभी के लिए ये जरूरी हो जाता है कि देश विरोधी ताकतों को न पनपने दिया जाए

By
Shaminder kaur kaler

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